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Monday, November 05, 2012

फर्गुदिया : ' इनकी भी सुने ' कार्यक्रम की रिपोर्ट


फर्गुदिया : ' इनकी भी सुने ' कार्यक्रम पर सईद अयूब की रिपोर्ट
सईद अयूब : कुशीनगर ( उत्तर प्रदेश )
उच्च शिक्षा जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से
अमेरिकन इंस्टीटयूट ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ में अध्यापन
संस्थापक, सह-निदेशक S . A  ZABEEN  Pvt . Ltd ज्ञानोदय और विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशन
वे जिस तरह के माहौल में रहती हैं और काम करती हैं, वह सचमुच शोचनीय है. उन महिलाओं में अधिकतर ने बताया कि उन्हें महीने में कोई छुट्टी नहीं मिलती (जबकि सरकार द्वारा महीने में चार छुट्टियाँ निर्धारित की गयी हैं) अगर किसी कारण वश वे छुट्टी लेती हैं तो मालिक पैसे काट लेते हैं, वे जिन झुग्गी-झोंपड़ियों में रहती हैं उनका किराया हज़ार रुपये से लेकर 1500 रूपये तक है जबकि सरकार द्वारा निर्धारित रेट 600-800 रूपये है. उनमें से कई के पतियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं, खुद वे भी कोई स्वस्थ नहीं थीं. उनमें से हर एक अपनी उम्र से बड़ी दिख रही थी. उनमें से कई का विवाह तभी हो चुका था जब विवाह करना भारतीय क़ानून के अनुसार अपराध है. वे महीने में (पति की कमाई को जोड़ कर) जितना कमाती हैं, उतने से दिल्ली जैसे शहर नहीं बल्कि गाँव-देहात में भी जीवन-यापन करना अत्यंत मुश्किल है. इसका मतलब है बस वे किसी तरह से जी रही हैं. दिन भर काम करने के बाद वे उन्हें अपने घरों में भी काम करना पड़ता है, (कभी-कभी) पति के ताने, लात-घूसे और शराब की बदबू को भी बरदास्त करना पड़ता है. बच्चों की पढ़ाई और उनकी हारी-बीमारी और विवाह की चिंता इन महिलाओं को असमय ही बूढ़ा कर दे रहा है.

 

नंत समस्याओं में से ये कुछ समस्याएँ हैं जो आज निकलकर सामने आयीं. अगरचे मैं अपने घर काम करने वालियों वालों से यथासंभव संवाद करता रहता हूँ और उनके दुख-सुख से कुछ हद तक परिचित भी हूँ पर आज का अनुभव कुछ अलग था. 'फर्गुदिया' समूह द्वारा कीर्ति नगर, दिल्ली में आयोजित 'इनकी भी सुनें' कार्यक्रम में 40 से अधिक घरों में काम करने वाली महिलाओं से मिलना और उनकी समस्याओं को सुनना और उनसे संवाद स्थापित करना कई मायनों में एक सुखद अनुभव था. सबसे अधिक सुखद था यह देखना कि कार्यक्रम के अंत के बाद भी बहुत सी महिलाएँ हमारे पास रुकी रहीं और बात-चीत करती रहीं. वे सब खुश थीं. हमसे बातें करके, अपनी समस्याएँ बता कर, उनका समाधान / समाधान करने का आश्वासन पाकर, हमारे साथ सहज होकर, फोटो खिंचवा कर और 'फर्गुदिया' ग्रुप की ओर से अपना छोटा-मोटा उपहार पाकर. यह सब सुखद अनुभव तो था पर उनके जीवन के बारे में अगर ठीक से सोचा जाए और महसूस किया जाए तो रोंगटे खड़े करने वाले सच हमारे सामने आ जाते हैं. आज की मीटिंग में उन काम करने वाली महिलाओं की कुछ समस्याओं का तत्काल समाधान कर दिया गया, कुछ समस्याओं जैसे राशन कार्ड का न होना आदि के समाधान के लिए प्रयास किये जायेंगे, संभव होगा तो 'फर्गुदिया' ग्रुप के सदस्य सब महिलाओं से अलग-अलग मिलेंगे. उद्देश्य तो अच्छा है, हम कितना सफल हो पाते हैं यह आप सबके सहयोग, दुआओं और शुभकामनाओं पर निर्भर करता है.
ज का कार्यक्रम अगर संभव हो पाया तो शोभा मिश्रा, वंदना ग्रोवर और भरत तिवारी जी के अथक परिश्रम के कारण.चंद्रकांता और डॉ.सुनीता कविता का योगदान भी कम नहीं था. कार्यक्रम में इन लोगों के अतिरिक्त अंजू शर्मा, राघव विवेक पंडित, आनंद द्विवेदी, संतोष राय, रोहित आदि से मिलकर बहुत अच्छा लगा. एक बात और स्पष्ट कर दूँ कि अपनी व्यस्तता के कारण आशुतोष कुमार जी इस कार्यक्रम में नहीं आ सके किंतु इस कार्यक्रम की रूप-रेखा पिछली मीटिंग में उनसे मिले बहुमूल्य सुझावों के आधार पर बनायी गयी थी और उनसे मिले लगातार प्रोत्साहन ने हम सबको इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है. आशा है कि भरत भाई कुछ तस्वीरें लगाएँगे आज के इस छोटे से पर अर्थपूर्ण कार्यक्रम के.
- सईद अयूब ५/११/२०१२ , नई दिल्ली 



Thursday, May 31, 2012

रश्मि भारद्वाज जी की रिपोर्ट


Rashmi Bhardwaj
7 minutes ago ·
फरगुदिया को समर्पित काव्य संध्या , बदलते वक्त का आगाज
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कविताएं समाज का प्रतिबिंब होती हैं . जहां एक और यह हमें हमारे अवगुणों और कमियों के लिए सचेत करती हैं, वहीं अपनी व्यापक संवेदना से हमारे हृदय में भी मानवीय संवेदना, करुणा, प्रेम आदि भावों का संचार करती हैं. साहित्य का उद्देश्य अगर समाज में चेतना लाना हो, लेकिन यह करते हुए भी यदि उसका कला पक्ष बरकरार रहे तो उसका सौंदर्य द्विगुणित हो जाता है . दिनांक 27 मई 2012 को आनंद पेक्स, रोहिणी सेक्टर -9 में आयोजित काव्य संध्या ‘एक शाम फरगुदिया के नाम’ कुछ ऐसा ही कार्यक्रम था, जहां एक और तो कविता अपने सम्पूर्ण सौंदर्य के साथ उपस्थित थी, वहीं इन कविताओं में मौजूद संवेदना, गहन करुणा और कुछ बदलने की चाहत ने इस पूरे कार्यक्रम को एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया और वहाँ उपस्थित हर श्रोता अपने मन में यही संकल्प लेकर लौटा होगा कि अपने आस पास कोई और फरगुदिया नहीं बनने दूँगा .
फरगुदिया 14 साल की एक अबोध लड़की थी जो किसी वहशी की दरिंदगी का शिकार होकर गर्भवती हो गयी . समाज के भय से उसकी गरीब माँ ने उसे कोई दवा पिला कर गर्भ गिरवाने की कोशिश की लेकिन दुर्भाग्य से उस मासूम का कोमल शरीर यह सारे क्रूर आघात झेल नहीं पाया और एक गहन यंत्रणा झेल कर वह हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ कर चली गयी. उसी फरगुदिया की स्मृति में उसकी बाल सखा श्रीमती शोभा मिश्रा द्वारा इस काव्य संध्या का आयोजन किया गया जहां कविताओं के बहाने अपने अन्तर्मन को टटोलने की कोशिश की गयी और साथ ही यह जबाव पाने का प्रयत्न भी कि क्या कमी रह जाती है हमारे इंसान बनने में कि हम अपने समाज की हजारों फरगुदियाओं का दर्द अनदेखा कर जाते हैं. शोभा मिश्रा, जिन्होने बचपन से उसके दर्द को करीब देखा था लेकिन तब उसे अभिव्यक्त भी नहीं कर पायीं थी ने उस दर्द को सहेज कर रखा , जिसकी परिणति आज हम फ़ेसबुक पर संचालित फरगुदिया समूह और इस काव्य संध्या के रूप में देख रहे हैं.
कार्यक्रम में हिन्दी साहित्य की कुछ वरिष्ठ और कुछ नयी कवियत्रियों ने काव्यपाठ किया . वैसे तो लगभग सभी कविताओं का विषय स्त्री और उससे जुड़ी चुनौतियाँ ही थी लेकिन कविताओं में मौजूद संवेदना किसी वर्ग विशेष तक संकुंचित नहीं रहते हुए मानवीय भावनाओं का दर्पण सरीखी प्रतीत हो रही थी, एक ऐसा संसार रचने के लिए आह्वान करती प्रतीत हो रही थीं जहां जाति , धर्म , वर्ग , लिंग हर भेदभाव से ऊपर उठ सिर्फ मनुष्यता और मनुष्य मात्र के लिए प्रेम ही शेष रह जाता है .काव्य पाठ करने वाली कवियत्रियाँ थीं – स्वाति ठाकुर, निरुपमा सिंह, सोनरूपा विशाल ,रश्मि भारद्वाज ,विपिन चौधरी ,लीना मल्होत्रा ,स्नेह सुधा नवल ,सुमन केशरी अग्रवाल और सविता सिंह . कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध वरिष्ठ कवियत्री सविता सिंह ने की. नामचीन कवियत्री सुमन केशरी अग्रवाल मुख्य अतिथि और लोकप्रिय कवियत्री स्नेह सुधा नवल विशिष्ट अतिथि रहीं.कार्यक्रम का संचालन रश्मि भारद्वाज ने किया.

एक विशिष्ट उद्देश्य को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में बहुत कुछ था जो बहुत ही खास और सबसे अलग था . दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ अनारा देवी के हाथों हुआ . अनारा कोई नामचीन हस्ती नहीं, एक मेहनतकश औरत है, जिसने नशे के आदी पति की मौत के बाद 7 बच्चों के परिवार का अकेले लालन-पालन किया . स्त्री सशक्तिकरण का जीता जागता स्वरूप अनारा इस बात का प्रमाण है कि एक औरत विषम परिस्थितियों में भी टूटती नहीं, अपने और अपने परिवार का अस्तित्व बचाए रखने के लिए अंतिम सांस तक संघर्षरत रहती है. कार्यक्रम में मंजु दीक्षित का सम्मान उस स्त्री का सम्मान था जो यदि ठान ले तो मौत को भी विजित कर सकती है. कैंसर के अंतिम अवस्था में पहुँची मंजु से डाक्टरों ने उनकी अंतिम अभिलाषा पूछी तो उनका उत्तर था जीवन और अपनी उत्कट जिजीविषा के बल पर उन्होने कैंसर को परास्त करने में कामयाबी हासिल की और आज अपने परिवार के साथ जीवन, ऊर्जा और आत्मविश्वास की जीवंत ज्योति बनी एक सुखद जीवन व्यतीत कर रही हैं .
कार्यक्रम में कई गण्यमान व्यक्तियों ने शिरकत की . वरिष्ठ आलोचक और साहित्यकार पुरुषोत्तम अग्रवाल , दूरदर्शन के भूतपूर्व डाइरेक्टर, वरिष्ठ कवि एवं आलोचक नन्द भारद्वाज , व्यंग जगत के दिग्गज ,युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता हरीश नवल, प्रतिष्ठित कवि प्रेम भारद्वाज, मगहर गौण पत्रिका के संपादक और चर्चित कवि मुकेश मानस, दिल्ली विश्वविध्यालय में एसोशिएट प्रोफेसर डॉ गीता सिंह, कवियत्री डॉ वंदना ग्रोवर, फ़ेसबुक पर संचालित सखी ग्रुप की सह संचालिका अरुणा सक्सेना, कवि रवीन्द्र के दास , ज्योति पर्व प्रकाशन से जुड़े अरुण चन्द्र रॉय, मशहूर गजलगो एवं इंटीरियर डिजाएनर भारत तिवारी, चर्चित कवि आनंद द्विवेदी, कवि सुबोध कुमार, साहिल कुमार, डॉ रूपा सिंह , पूनम मतिया आदि उल्लेखनीय थे. नंद भारद्वाज और हरीश नवल ने अपने बहुमिल्य विचार श्रोताओं से बाँट कर कार्यक्रम की गरिमा में चार चाँद लगा दिये .

फरगुदिया को समर्पित यह कार्यक्रम एक प्रयास है उन्हे आवाज़ देने की जो इससे मरहूम हैं , जिनकी व्यथा अनकही ही रह जाती है. यह कार्यक्रम एक शंखनाद है, जिसकी गूंज हमेशा ही समाज में जागृति का संचार करेगी और वंचितों को एक मंच प्रदान करेगी अपनी पीड़ा को अभिव्यक्त करने के लिए और उस पीड़ा , उस दर्द की अभिव्यक्ति का माध्यम कविता से बढ़कर और क्या हो सकता है . इस सफल, प्रेरक और सार्थक कार्यक्रम के आयोजन के लिए कवियत्री शोभा मिश्रा, उनके पति संजय मिश्रा और मशहूर कहानीकार और ‘खुले में रचना’, नवसृजन आदि कई सृजन को समर्पित कार्यक्रमों के प्रणेता सईद अयुब विशेष बधाई और शुभ कामनाओं के हकदार हैं . धन्यवाद ज्ञापन करने आए सईद अयुब ने फरगुदिया को समर्पित इस कार्यक्रम को भविष्य में नयी ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लेते हुए इसे सालाना आयोजित करने , स्त्री विषयक मुद्दों से जुड़े लेखन के लिए 11,000 रुपए के एक विशेष साहित्यिक पुरस्कार,और निर्धन गरीब लड़कियों की शिक्षा संबंधी व्यवस्था करने जैसी सार्थक घोषणाएँ कर कार्यक्रम और कविता को जनमानस और उनके जीवन से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास किया है जो आने वाले समय में ना सिर्फ कविता के भविष्य को स्वर्णाक्षरों में दर्ज़ करेगा बल्कि उसे आभिजात्य वर्ग की चारदिवारी से निकाल उन सभी वंचितों तक भी अवश्य ही ले जाएगा जिनके लिए दो जून की रोटी से बढ़कर और कोई सरोकार ही नहीं. इसमे कोई दो राय नहीं कि यह कार्यक्रम उन सब की आवाज़ बनेगा जिनकी आवाज़ इस सुविधाभोगी समाज की स्वार्थ लिप्सा के आवरण के नीचे जबरन दबा दी गयी है और इसका माध्यम होगी मानव की सर्वोत्तम कृति-कविता


, Bharat Tiwari, Sayeed Ayub and 13 others like this.
Vandana Grover Ek behad naazuk vishay ko aapne poori samvedansheeltaa k saath nibhaaya.. Rashmi .... aapki reporting n:sandeh bahut prabhaavshaali hoti hai ....par sanchaalan mein aapne jis samvedansheelta aur dakshtaa ka parichay diyaa hai ....kaabil-e-taareef hai ...Duaa hai aap bahut taraqqi kare'n ..achchha lagaa aapko dekh kar ...
Thursday at 5:36pm · Unlike ·  4

Vandana Grover Thanks Shobha ..
Thursday at 5:36pm · Unlike ·  2

Nand Bhardwaj शोभाजी, आपने वाकई फरगुदिया की विस्‍मृत पीड़ा और उसके जीवन-संघर्ष को जो मानवीय गरिमा और एक व्‍यापक संदर्भ दिया है, उसकी जितनी सराहनीय की जाय कम है। इस कार्यक्रम को भी आपने जिस कल्‍पनाशीलता और संवेदनशीलता प्रदान की है, वह आपकी उसी मानवीय करूणा का विस्‍तार है। वह भाव आपके पूरे व्‍यक्तित्‍व और आचराण्‍ा में झलकता है। इसे बनाये रखिये। हमें सदा अपने साथ समझें। शुभकामनाएं।
Thursday at 5:47pm · Unlike ·  8

Shayak Alok मैं आपके सरोकारों की मुक्त कंठ से सराहना करता हूँ सर.. निश्चित रूप से आपका दिल्ली प्रवास व्यस्तताओं भरा रहा होगा लेकिन उसके बावजूद संवेदना के सवाल पर इस गोष्ठी में आपकी गरिमामयी उपस्थिति ने हम नवोदितों को भी प्रेरणा दी है ... मैं वहां उपस्थित तो न हो सका किन्तु फरगुदिया के बहाने इस छेड़े गए संवाद और संवेदना से बीते हफ्ते भर से खुद को जोड़े रखा ..कविता के माध्यम से संवाद फ़ैलाने की एक पहल भी की .. यह संस्कृति और गहरे रंग पकडे इस आकांक्षा के साथ आपको आभार कहना चाहता हूँ.. Nand Bhardwaj
Thursday at 7:23pm · Unlike ·  3

Nand Bhardwaj शुक्रिया शायक।
Thursday at 7:25pm · Like ·  2

Rashmi Bhardwaj bahut shukriya Vandana di...
Thursday at 9:59pm · Like ·  2
Shobha Mishra sab kuchh aap jaise mitron ke saath ki vajah se sambhav ho paaya hai .. aapka bahut bahut dhanywad Vandana ji !!
Yesterday at 5:11am · Like ·  3
Shobha Mishra ‎Nand Bhardwaj सर, फर्गुदिया के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे को लगभग पच्चीस वर्ष हो गएँ हैं , लेकिन आज तक मैं उसकी दर्दनाक मृत्यु को भूल नहीं पायी हूँ , मैं हमेशा उसकी कराह को महसूस करती रही, फर्गुदिया की आवाज़ को सभी तक पहुचाने के लिए मैंने एक छोटा सा प्रयास किया हैं, मेरे इस प्रयास में लगातार आप मेरे साथ बने हुएं हैं, आपके प्रेरणादायक शब्दों से खुद में उर्जा महसूस कर रही हूँ ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!
Yesterday at 5:40am · Like ·  4

Sayeed Ayub एक बहुत ही सुंदर और मार्मिक रिपोर्ट है रश्मि जी. आपने अपने शब्दों से न केवल उस शाम को फिर से जीवंत कर दिया है अपितु फरगुदिया के दर्द को इस तरह से बयाँ कर दिया है कि आँख एक बार फिर से भर आयी है. अब हमें प्रयास करना है कि हम अपनी आँखें भरकर ही न बैठ जाएँ बल्कि कुछ ठोस काम भी करते रहें. शोभा दी की तो जितनी तारीफ़ की जाए, कम ही होगा. आज के ज़माने में कितने लोग हैं जो इस तरह से दूसरों के दुःख को महसूस करते हैं, उस दुख से ज़िंदगी भर जूझते रहते हैं और अंततः उस दुःख की परिणति इतने अच्छे और नेक उद्देश्यों में कर देते हैं? साथ ही उनके पति संजय मिश्रा जी की भी हमें तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने इतनी संवेदनशीलता से अपनी पत्नी की भावनाओं का ध्यान रखा और न केवल यह आयोजन करवाया बल्कि क़दम क़दम पर साथ खड़े रहे. इन दोनों का आतिथ्य कभी न भूलने वाला है. साथ ही जैसा आनंद द्विदी जी ने कहा कि इस कार्यक्रम में सम्मिलित सभी कवयित्रियों के साथ साथ, वे सभी लोग साधुवाद के पात्र हैं जो इस कार्यक्रम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े. सविता सिंह जी ने फरगुदिया की कहानी थोड़ी सी ही सुनी, और उन्होंने कार्यक्रम में आना स्वीकार कर लिया. मुझे पता था कि सुमन जी उन दिनों बहुत व्यस्त थी. अगले दिन बेटी की परीक्षा थी. उसे माता-पिता का सपोर्ट चाहिए था. पर फरगुदिया की कहानी पढ़ते ही उन्होंने आने के लिए हाँ कर दिया. स्नेह सुधा नवल जी भी सहर्ष तैयार हो गयीं. Sonroopa Vishal जी ने, जैसा कि शोभा दी ने बताया, केवल एक फोन पर बदायूँ से आना स्वीकार कर लिया. लीना जी भी बहुत सारी व्यस्तताओं से गुज़र रही थीं, सबसे बड़ी बात यह थी कि घर पर बेटी और पति दोनों बीमार थे, फिर भी वे आयीं. आपको अगले दिन अपने मायके जाना था, बहुत सारी तैयारियाँ पूरी नहीं हुई थीं, फिर भी आपने समय निकाला. अंजू शर्मा जी गला खराब होने के बावजूद आयीं. निरुपमा जी बीमार थीं, फिर भी उन्होंने आना नहीं टाला. स्वाती अपने अकेडमिक काम को लेकर बहुत व्यस्त थी, पर फरगुदिया के नाम पर उसने भी तुरंत हाँ कर दी. वंदना शर्मा जी और गीता पंडित जी का न आ पाना दुखद तो था पर हम उनकी मजबूरियाँ भी समझ रहे थे. पुरुषोत्तम सर ने फरगुदिया के बारे में जानते ही यह फैसला कर लिया था कि चाहे जो भी हो, वे इस कार्यक्रम में आयेंगे. नंद सर ने शोभा जी के मुख से फरगुदिया की कहानी सुनते ही, इस कार्यक्रम में आने का फैसला कर लिया. हरीश नवल जी तो आरंभ से ही इस कार्य्रकम से जुड़े हुए थे....और भी जो लोग वहाँ आए, और जो किसी कारणवश नहीं आ पाए, उन सब लोगों ने फरगुदिया के प्रति जो संवेदना दिखाई और इस कार्यक्रम के प्रति जो सद्भावना दिखाई, उसने बहुत आश्वस्त किया कि यदि किसी अच्छे और नेक उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ा जाए तो बहुत सारे हाथ आगे आते हैं, मदद करने को, सहारा देने को. मैं तो आप सबका मन की गहराइयों से आभारी हूँ. और शोभा दी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि उनके इस अभियान में वे अकेली नहीं हैं. केवल मैं उनके साथ नहीं हूँ, बल्कि सैकड़ों-हज़ारों लोग उनके साथ हैं, और ये संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जाएगी. बहुत बहुत शुक्रिया रश्मि जी, इस सुंदर और मार्मिक रिपोर्ट के लिए और आपके कुशल संचालन के लिए.
Yesterday at 8:31am · Like ·  3

Rashmi Bhardwaj बेहद शुक्रिया सईद जी .... आपका योगदान तो हम सबसे बड़ा है , जयपुर शिफ्टिंग करीब होते हुए भी आप अंतिम क्षणों तक जुटे रहे .... आप शोभा दी और संजय मिश्रा जी वाकई बधाई के पात्र हैं ..... और प्रेरणा के भी .... फरगुदिया से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करती हूँ और इसे लेकर हम सबने जो सपने देखे हैं ,ईश्वर उन्हे पूरा करे यही दुआ है ... गरीब बच्चों की शिक्षा संबंधी घोषणा के लिए तो विशेष आभारी हूँ , इस बारे में जल्दी ही कुछ ठोस करना चाहती हूँ ....
Yesterday at 8:44am · Unlike ·  4

अंजू शर्मा की रिपोर्ट


अंजू शर्मा
Monday
'एक शाम : फर्गुदिया के नाम.....ये नाम है उस कार्यक्रम का जिसका आयोजन सईद अयूब के सहयोग ने प्रिय शोभा दी (Shobha Mishra) ने किया! सचमुच इसमें जमीनी स्तर पर कुछ करने की बात की गयी जो दिल को छू गयी, कविता पाठ भी हुआ, और कुछ घोषणाएं भी की गयी....जिनके मैं मुक्त कंठ से सराहना करती हूँ, लगातार आयोजनों और घर में मेहमानों के कारण काफी थकान थी और गला भी ख़राब था, तो मैंने कविता नहीं पढ़ी, पर हाँ अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज करायी और भविष्य में भी कोशिश करुँगी, कि पीड़ित और निम्न वर्ग की महिलाओं को समर्पित इस ग्रुप के उद्देश्य-पूर्ति में अपना सक्रिय योगदान दे सकूँ....
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You, Gita Pandit, Ashish Pandey and 51 others like this.
Dheeraj Kumar aapko na sunne dukhad tha
Monday at 7:02am · Unlike ·  2
Mohan Shrotriya शोभा मिश्रा ने नेक मिशन हाथ में लिया है. बधाई.
Monday at 7:10am · Unlike ·  4
सुनीता सनाढ्य पाण्डेय बहुत बधाई शोभा को और शुभकामनाएं तुम्हें भी.........
Monday at 7:14am · Unlike ·  3
Shobha Mishra Shukriya अंजू !! ek aur ek milkar hi gyarah banten hain ... aap jaise mitron ka saath rahega to nishchit roop se humara mishan kamyab hogaa ..!!
Monday at 7:20am · Like ·  3
अंजू शर्मा ‎Shobha di....main to hamesha aapke sath hoon....:)
Monday at 7:23am · Unlike ·  2
Dheeraj Kumar ‎@shobha ji aise kaam ki jimmedar lena use poora karne ko nirantar chalna bahut badi baat hai aapko bahut-bahut badhai ho aise ek safal aayojan ko aur yun hi nirantar chalte rahiye Fargudiya ke sath jo hua wo kisi ke sath na ho is kaam me ham ek din jaroor safal honge
Monday at 7:23am · Unlike ·  1
Shobha Mishra aap jaise mitron ka saath rahegaa to hum nirantar aise Ayojan karte rahengen .. Dhanywad Dheeraj !!
Monday at 7:33am · Like ·  1
Subhash Chander is punit kary ke liye shubhkamnaen
Monday at 9:08am · Unlike ·  2
Surendra Chaturvedi इसे कहते हैं मौखिक क्रांति.
Monday at 9:33am · Unlike ·  3
Om Banmali लेखन में अभिव्यत विचार और निजी जिंदगी में उस से मेल खाता आचरण आप में स्पष्ट दिखता है और इस संस्था से जुड़े और शब्द्कर्मी भी ऐसे ही होंगे ऐसी आशा है
Monday at 1:57pm · Unlike ·  2

पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की रिपोर्ट


एक शाम फरगुदिया के नाम कार्यक्रम के शुभारंभ का दीप-प्रज्वलन अनारा देवी के साथ सविता सिंह, सुमन केशरी और शोभा मिश्र ने किया।अनारा देवी का जीवन-संघर्ष अपने आप में कविता है।
कार्यक्रम में कैंसर को परास्त करने वाली जिजीविषा-सुश्री मंजु दीक्षित- का सम्मान किया जाना खासकर मन को छू गया। — with Suman Keshari Agrawal and Shobha Mishra.
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    • Rakesh Sinha यही युग धर्म है और साहित्य का रचनात्मक पक्ष भी
      May 27 at 3:19pm ·  ·  4

    • Sayeed Ayub शुक्रिया सर इसे शेयर करने के लिए. अनारा देवी एक गरीब विधवा हैं और घरों में काम-काज कर अपने सात बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. सबसे बड़ी बात कि उन्होंने अपनी बच्चियों की पढ़ाई में कोई कोर-कसर नहीं उठा रखा है. वे शिक्षा के महत्व को अच्छी तरह से समझती हैं.
      Monday at 4:25am ·  ·  5

    • Sayeed Ayub मंजु दीक्षित जी अपने आप में एक मिसाल हैं. कैंसर जैसी घातक बीमारी को अपनी जिजीविषा से परास्त कर पूरी उर्जा के साथ न केवल अपनी ज़िंदगी जी रही हैं बल्कि दूसरों को भी प्रेरणा दे रही हैं.
      Monday at 4:28am ·  ·  4

    • Leena Malhotra कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन अनारा देवी द्वारा करना मुझे बहुत अच्छा लगा.. ऐसे मेहनतकश लोग अपनी जिंदगी में संघर्षों की कलम से कवितायेँ लिख रहे हैं उन्हें सम्मान देना बहुत ज़रूरी है
      Monday at 4:40am ·  ·  3

    • Sayeed Ayub बिलकुल सही कहा आपने Leena ji!
      Monday at 4:53am ·  ·  1

    • Shobha Mishra सर , फोटो में कैद इस अद्भुत क्षण को शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!! एक दुर्घटना में हुई पति की मृत्यु के बाद अशिक्षित और बेसहारा अनारा देवी का अकेले इतने बड़े परिवार को संभालना और अपने बच्चों को शिक्षित करना इतना आसान काम नहीं था ..लेकिन उनकी लगन और हिम्मत को सलाम करतीं हूँ ... वो चारदीवारी से बाहर निकली और दिन रात कठिन परिश्रम करके बिना विचलित हुए अपने परिवार का भरण पोषण कर रहीं हैं |
      Monday at 5:40am ·  ·  6

    • Suman Keshari Agrawal कार्यक्रम सच में बड़ा सार्थक था...बहुत कुछ सोचने के लिए बाध्य करने वाला...
      Monday at 6:29am ·  ·  9

    • Chandrakanta Ck एक बेहद सार्थक आयोजन 'फरगुदिया'..
      समाज के घृणित बंधों को तिनका तिनका उधेड़ती कवियित्रियाँ,मन को बींध कर रख देने वाली उनकी रचनाएं और शोभा दी व सईद सर का यह साहसी प्रयास निश्चय ही एक ईमानदार कोशिश का संकेत था.स्वाति की कलम आत्मविश्वास से लबरेज थीं और विपिन की ‘रजस्वला’ पर अभिव्यक्ति नें मन को छू लिया.शायक की रचना हमेशा की तरह बंद दरवाजों पर दस्तक देती सी .सुमन जी की चिर-परिचित सहजता और स्त्री मन को एक खास लहजे में टांकना हर बार आकर्षित करता है..
      स्त्री सम्वेदना को मंच पर एकजुट देखकर उस टूटे हुए मन को कहीं गहरी सांत्वना और साहस मिला जिसे जब-तब-अक्सर समाज के एकतरफा नियमों/रिवाजों के समक्ष आहूत कर दिया गया अंत में,एक बात जो अभी स्त्रियों को सीखनी है वह खुद को देह-जड़ता की परीधि से बाहर ले आना ..

      Tuesday at 12:11pm ·  ·  2

    • Shobha Mishra ‎(एक बात जो अभी स्त्रियों को सीखनी है वह खुद को देह-जड़ता की परीधि से बाहर ले आना ..) aapke is kathan se 100% sahmat hoon ..! shukriya Chandrakanta !!

    • Shobha Mishra Shukriya Suman Di !!!

सईद अयूब द्वारा कार्यक्रम की रिपोर्ट



कल का कार्यक्रम कुछ विशेष था. 'फरागुदिया के नाम-एक शाम' कहने के लिए 'फरगुदिया' के नाम पर एक कविता पाठ का कार्यक्रम था. लेकिन कविताओं के अलावा वहाँ बहुत कुछ और भी था जिसने उपस्थित श्रोताओं के मन को छुआ. सबसे पहले दीप-प्रज्वलन एक ऐसी महिला से जिनका ज़िक्र हाशिए में भी नहीं होता. घरों में काम-काज कर अपने सात बच्चों के परिवार का पालन-पोषण और अपनी बच्चियों को अच्छी शिक्षा देने का सपना रखने वाली विधवा अनारा देवी ने कार्यक्रम अध्यक्षा सविता सिंह जी और मुख्य अतिथि सुमन केशरी जी के साथ दीप प्रज्वलन किया...कैसर जैसी घातक बीमारी को अपनी जिजीविषा से परास्त कर बहुत सारे लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनीं मंजु दीक्षित जी का सम्मान.

वरिष्ठ कवयित्रियों सविता सिंह, सुमन केशरी, स्नेह सुधा नवल के साथ साथ लीना मलहोत्रा विपिन चौधरी, सोनरूपा विशाल, रश्मि भारद्वाज, निरुपमा सिंह, स्वाती ठाकुर की सुंदर, प्रेरणादायक कविताएँ... अंजू शर्मा ने गला खराब होने के कारण कविता पाठ नहीं किया. शुरुआत में मंच संचालिका रश्मि भारद्वाज के आग्रह पर फरगुदिया के बारे में बताते हुए और आगंतुकों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम आयोजक शोभा मिश्रा जी ने भी अपनी एक कविता का पाठ किया.

और प्रोफ. हरीश नवल और वरिष्ठ कवि व आलोचक नंद भारद्वाज जी के प्रेरणादायी वक्तव्य. कार्यक्रम में प्रोफ़. पुरुषोत्तम अग्रवाल जैसे व्यक्तित्व की स्नेहिल, गरिमामय और प्रेरणादायी उपस्थिति...

श्रोताओं में मुकेश मानस, रवीन्द्र के दास, स्वतंत्र मिश्र, भरत तिवारी, सुबोध कुमार, रूपा सिंह, स्नेहा देसाई, धीरज कुमार, रोहित कुमार, नरेंद्र कुमार भारती, भास्कर ठाकुर आदि कवि-साहित्यकार मित्रों की उपस्थिति....

और कार्यक्रम आयोजक शोभा मिश्रा और उनके पति संजय मिश्रा जी का स्नेहिल, प्रेम में भीगा हुआ आतिथ्य और सुंदर आयोजन....

और अंत में इस कार्यक्रम को हर वर्ष करवाने, फरगुदिया के नाम पर ग्यारह हज़ार रूपये के एक पुरुस्कार की घोषणा और एक आपसी सहमति (जिसकी घोषणा कार्यक्रम में नहीं की गयी) कि हर वर्ष फरगुदिया की माँ को कुछ (कम से कम पाँच हज़ार रूपये) आर्थिक सहायता और यदि संभव हुआ तो कुछ गरीब, बेसहारा बच्चियों की पढ़ाई में यथासंभव मदद (आर्थिक या किसी और प्रकार की)...

'फरगुदिया के नाम-एक शाम' कार्यक्रम कुछ विशेष तो था ही.

अगले कार्यक्रम में आप सबसे इस मुहिम में जुड़ने और सहयोग करने की अपील.
 ·  · Monday at 6:08am · 

  • 50 of 64

    • Mohan Shrotriya इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन आयोजकों के गहरे सामाजिक सरोकारों को दर्शाता है. बहुत बधाई तुम्हें, शोभा मिश्रा व अन्य मित्रों को.
      Monday at 7:15am ·  ·  2

    • Saroj Singh बहुत प्रसन्नता हुई कार्यक्रम की सफलता देख पढ़कर बहुत अच्छी रिपोर्ट ...आपकी !

      एक अच्छे सरोकार के लिए किया गया आयोजन सफल रहे इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है अगले वर्ष इस कार्यक्रम में उपस्थित होने का पूर्ण प्रयास रहेगा मेरा !!एकबार फिर से बधाई !!

      Monday at 7:39am ·  ·  4

    • Sushila Shivran बहुत अच्छा लगा इस नेक सोच, जो हकीकत का रूप ले चुकी है के विषय में जानकर। मेरा सहयोग है और मैं भी इस मुहिम से जुड़ने मे मुझे भी आत्मतुष्टि मिलेगी।
      Monday at 8:49am ·  ·  2

    • Sayeed Ayub Vandana GroverDheeraj, bahut bahut shurkriya! Aapke shabdon se hausla milta hai.
      Monday at 9:30am ·  ·  2

    • Sayeed Ayub Ismat Zaidi Shefa, Bahut bahut shukriya!
      Monday at 9:30am · 

    • Sayeed Ayub Mohan Shrotriya, सर, आपकी उपस्थिति आशीर्वाद के रूप में हमेशा और हर जगह बनी रहती हैं. आपके शब्द कितने प्रेरणादायी होते हैं, बताना असंभव है. बहुत बहुत आभार सर!
      Monday at 9:32am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Saroj Singh ji, आपकी शुभकामनाएँ जुड़ी हुई थीं इस कार्यक्रम से. कार्यक्रम सफल होना ही था. आप का सदैव स्वागत है. बहुत बहुत आभार!
      Monday at 9:34am · 

    • Sayeed Ayub Sushila Shivran ji, बहुत बहुत शुक्रिया! आपका स्वागत है. इस मुहिम से आपका जुड़ना हमें भी अच्छा लगेगा.
      Monday at 9:36am ·  ·  1

    • Kiran Arya सईद ख़ुशी हुई ये जानकार की कार्यक्रम कुछ विशेष रहा और सफल भी........अगली बार कोशिश होगी हमारी भी की इसका हिस्सा बन पाए........शुभं
      Monday at 9:46am ·  ·  1

    • Arun Chandra Roy aayojan achha tha.. kavitayen aur bhi achhi theen...
      Monday at 10:01am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Kiran Arya ji, बहुत बहुत शुक्रिया! आपका सदैव स्वागत और इंतेज़ार है.
      Monday at 10:02am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Arun bhai, aapse milna bhi bahut accha tha. :-), shukriya!

    • Arun Chandra Roy mujhe bhi aaplogon se milkar achha laga.. aapko apne prakashan se parichay n kara saka.. wo agli mulakat me
      Monday at 10:04am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub दो-तीन और महत्वपूर्ण नाम छूट गए हैं ऊपर- Anand Dwivedi ji, Sahil Kumar ji aur Imtiyaz Azad ji! आप सबका शुक्रिया इस कार्यक्रम को सार्थकता प्रदान करने के लिए.
      Monday at 10:05am ·  ·  1

    • Sonroopa Vishal इतने अच्छे और सारगर्भित कार्यक्रम से मैं भी जुड़ पाई उसके लिए धन्यवाद शब्द थोड़ा छोटा है .......आयोजन के लिए बहुत बहुत बधाई !
      Monday at 10:54am ·  ·  2

    • Rashmi Bhardwaj bahut achhi aur santulit report..badhai...
      Monday at 11:16am ·  ·  2

    • Alka Srivastava ek sarahniya pryass .
      Monday at 11:34am ·  ·  1

    • Prem Chand Gandhi कविता की संवेदना को इस तरह जमीनी धरातल पर ले जाने के इस सद्प्रयास के लिए आपकी किस तरह सराहना की जाए, समझ नहीं आता... मेरी शाश्‍वत शुभकामनाएं।
      Monday at 11:57am ·  ·  1

    • Virender Bhatia sayeed sahab, miss kar gya prog, delhi mei tha, fir bhi rah gya
      Monday at 12:20pm ·  ·  1

    • Subodh Kumar एक अच्छी शुरुवात, शोभा जी को हार्दिक बधाई ,
      आइये मिलकर इसे और उचाइयों तक ले जाये........

      मै अकेला ही चला था ज़िंदगानी के सफर मे
      लोग मिलते गए काफिला बनता गया ।

      सईद भाई एक अच्छी रेपोर्टिंग, बहुत बधाई।

      Monday at 12:26pm ·  ·  2

    • Kuldeep Anjum बस इत्तिला दे दीजियेगा सईद भाई ....जो कुछ भी सहयोग बन पड़ेगा हाज़िर रहेंगे.....और इस शाम की अहमियत वाकई इसके नेक उद्देश्य से और बढ़ जाती है !!
      Monday at 2:06pm ·  ·  2

    • Nand Bhardwaj इस कार्यक्रम में शामिल होना मुझे बेहद सुखद लगा। जैसा रिपोर्ट में सईद ने कहा भी इस कार्यक्रम में वाकई ऐसा बहुत कुछ तो जिसने लोगों के मन को छुआ। मैं संयोगवश ही दिल्‍ली गया था, और शोभाजी ने आग्रह किया तो उत्‍सुकतावश चला गया, कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सचमुच लगा कि अगर न गया होता तो एक बेहतरीन अनुभव से वंचित रह जाता। शोभाजी और उनकी पूरी टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
      Monday at 2:44pm ·  ·  5

    • सुनीता सनाढ्य पाण्डेय bahut bahut Badhaai....Sayeed Ayub ji aapko bhi aur Shobha ko ek baar fir se dher saaari badhai....hopefully agli baar mujhe bhi yah kaarykram attend karne ka saubhaagya mile.....main kis prakaar sahayataa kar sakti hoon is nek uddeshya me kripayaa batayen.....
      Monday at 2:49pm ·  ·  2

    • Shobha Mishra Nand ji , Sir karyakram me aapki Garimamay upasthiti se main Abhibhut hoon !! aapke prernadayak vaktavya se mujhe aur sabhi ko bahut kuchh seekhne ko mila ... Aapka Hardik Aabhaar Sir !!
      Monday at 2:58pm ·  ·  3

    • Shobha Mishra Shukriya सुनीता ji , aap is nek uddeshya me humare saath judna chahtin hain .. ye humare liye bahut khushi ki baat hai ..:) kuchh dino me aapko Sayeed ya mere dwara is uddeshya se judi saari jaankaari mil jaayegi ..:)
      Monday at 3:02pm ·  ·  2

    • Sayeed Ayub Arun Chandra Roy bhai, lagta hai agli mulaaqat jald hi hogi. :-)
      Monday at 5:29pm ·  ·  1

    • Rituparna Mudra Rakshasa karyakram mein shamil na ho pane ke afsos ko aap ki iss jeewant report ne kuchh kam kiya hai... hardik shubh kamnayein... Sayeed Ayub ji
      Monday at 7:33pm ·  ·  1

    • Gita Pandit एक बार फिर बधाई .... काश! मैं भी शामिल हो पाती वैसे मन से मैं वहीं थी सईद भाई ..
      Tuesday at 2:49am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Sonroopa Vishal, आपसे मिलना और आपको सुनना सचमुच एक सहेज कर रखने लायक अनुभव था. आपकी सुरीली आवाज़ का जादू अभी तक ताज़ा है. आशा है जल्द ही कहीं और आपको सुनने का अवसर मिलेगा.
      Tuesday at 3:17am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Rashmi Bhardwaj, Bahut bahut shukriya!

    • Sayeed Ayub Alka Srivastava ji, bahut bahut shukriya!
      Tuesday at 3:18am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Prem भाई, आपकी इस प्रकार की तारीफ़ और शुभकामनाओं के बदले किस तरह से आभार व्यक्त करूँ, समझ में नहीं आता. आप जैसे लोगों की शुभकामनाओं और सदेच्छाओं से ही यह कार्यक्रम सफल हुआ. बहुत बहुत आभार!

    • Sayeed Ayub Virender Bhatia ji, koi baat nahi, agli baar :-)

    • Sayeed Ayub Subodh bhai, आप तो क़दम क़दम पर मेरे साथ हैं. आप जैसा दोस्त पाना सचमुच खुशनसीबी की बात है. बहुत बहुत शुक्रिया. उम्मीद है कि जल्द ही मिलेंगे!

    • Sayeed Ayub Kuldeep, तुम्हारे जैसे दोस्तों के सहयोग की हमेशा आवश्यकता रहेगी. मैं अवश्य सूचित करूँगा. शोभा दी ने जो शुरुआत की है उसे एक कविता पाठ तक सीमित नहीं करना है. बहुत आगे ले जाना है और बिना दोस्तों के सहयोग के यह काम असंभव है. बहुत बहुत शुक्रिया ऑफर के लिए!
      Tuesday at 3:27am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Nand Bhardwaj, सर, आपकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को जो गरिमा प्रदान किया और आपके वक्तव्य ने हमें जो प्रेरणा दी, उसके लिए हम मन से आपके आभारी हैं. दिल्ली की इतनी व्यस्त यात्रा के बावजूद आप न केवल कार्यक्रम में आये बल्कि समय से पहले पहुँच कर अंत तक आप वहाँ रहे, कवयित्रियों और हम सबका उत्तसाह बढ़ाया, यह सब सच में हम सबको बहुत गहरे से छू रहा था. बहुत बहुत आभार सर!
      Tuesday at 3:31am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Sunita ji, bahut bahut shukriya. Aapka intezar kai sadiyon se hai. Aasha hai kisi n kisi kaarykram men aap se jald mulaqat hogi. SAHYOG ke offer ke liye bahut bahut shukriya! Hamen aap sabke sahyog ki lagatar aavashykata padegi. Ham iske baare men samay samy par aapko preshan karte rahenge. :-) (Kya aajkal aap Jaipur men hain?)
      Tuesday at 3:35am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Rituparna ji, Par hamara afsos ab tak qayem hai ki aap se ab tak mulaaqat na ho saki. Ummeed hai yah afsos jald hi door hoga. Bahut bahut shukriya!
      Tuesday at 3:37am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Gita di, हम आपके मन को वहाँ मंडराते हुए देख रहे थे इसलिए आपकी अनुपस्थिति को लेकर कोई शिकायत नहीं है. :-), हाँ अफ़सोस ज़रूर है. अगर आप वहाँ होती तो महफ़िल का रंग कुछ और निखरता. बहरहाल, जल्द ही कहीं और...किसी और कार्यक्रम में...आशा है आप पूरी तरह स्वस्थ हैं. बहुत बहुत शुक्रिया बधाई के लिए.
      Tuesday at 3:40am ·  ·  1

    • सुनीता सनाढ्य पाण्डेय Sayeed Ayub जी....शुक्रिया...पर मैं ऐसी कोई हस्ती नहीं जिसका इंतज़ार सदियों से किया जाये.....:)....आपके जयपुर वाले कार्यक्रम का क्या हुआ....मैं तो देखिये उसके लिए परदेस छोड़ कर देस मे आ गयी हूँ....:))
      Tuesday at 6:15am ·  ·  1

    • Sahil Kumar एक बहुत ही अच्छी और सुलझी हुई रिपोर्ट सईद भाई द्वारा प्रस्तुत की गई है | आयोजन की सफलता के लिए सईद भाई, शोभा मिश्रा जी व संजय मिश्रा जी को ढेरों शुभकामनाएं | मुख्य अतिथि सुमन केसरी जी की उपस्तिथि, सविता सिंह जी की अध्यक्षता और रश्मि भरद्वाज जी के सफल संचालन में आयोजित इस आयोजन में बड़े नामों की उपस्तिथि, जैसा की सईद भाई ने बताया है, इस आयोजन की सफलता को बयां करती है | आयोजन में आमंत्रित सभी कवियत्रियों की बहुत ही उम्दा और बेहतरीन रचनाओं को सुनने का अवसर मिला | जो घोषणाएं सईद भाई ने की हैं वो भी काबिल-ऐ-तारीफ़ हैं |

      एक बहुत ही सफल आयोजन " फरगुदिया के नाम-एक शाम " | फरगुदिया सिर्फ एक नाम ही नहीं है, एक एहसास है उस पीड़ा का जो वहशी दरिंदों के द्वारा मासूम बच्चियों को मिलती है | इन दरिंदों के खिलाफ एक आवाज बनकर उभरता नाम है " फरगुदिया " | ये आवाज अब बंद नहीं होनी चाहिए और इन दरिंदों के खिलाफ ये जंग जारी रहनी चाहिए | एक बात मन में आ रही है की जब भी ऐसा आयोजन हो तो वो खुले मैदान में हो व ऐसी जगह हो जहाँ आने जाने वाला हर आम इंसान इस आवाज के साथ जुड़ सके और ये आवाज सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में परचम बनके लहराए व इन दरिंदों के खिलाफ ऐसा क़ानून बनाने में सहायक हो सके कि फिर कभी ये लोग ऐसा कदम उठाने की सोच भी ना सकें |

      Tuesday at 2:15pm ·  ·  1

    • Vipul Sharma ‎'फरगुदिया के नाम-एक शाम' कार्यक्रम को हर वर्ष करवाने, फरगुदिया के नाम पर ग्यारह हज़ार रूपये के एक पुरुस्कार की घोषणा और हर वर्ष फरगुदिया की माँ को कुछ (कम से कम पाँच हज़ार रूपये) आर्थिक सहायता और यदि संभव हुआ तो कुछ गरीब, बेसहारा बच्चियों की पढ़ाई में यथासंभव मदद (आर्थिक या किसी और प्रकार की)... इस नेक कार्य के लिए और सार्थक कार्यक्र्म के लिए शोभाजी, सईद भाई, और सभी उपस्थित गुणीजनो, को हार्दिक बधाई। इस कार्यक्रम के भविष्य मे भी सार्थक होने के लिए शुभकामनायें। समाज मे कुछ भी अच्छा करना यही सब कार्यक्रम की सम्पूर्ण सफलता को दर्शाता है। सभी उपस्थित मित्रों को सामाजिक सरोकार के निहित कार्यक्रम से जुडने के लिए बधाई और शुभकामनायें।।
      Yesterday at 1:06am ·  ·  2

    • Sayeed Ayub Sunita ji, जानकर सचमुच बहुत खुश हूँ कि मेरे कार्यक्रम में इतनी कशिश और ताक़त है कि वह लोगों को परदेस से अपने देश वापस खींच लाता है. शुक्रिया इस देश में वापस आने के लिए. :-), अगला 'खुले में रचना' जयपुर में ही है. १६ जून को. विस्तार से ५ जून तक सूचना पहुँच जायेगी. इस बार हिंदी की आनलाइन पत्रिकाओं और ब्लाग्स पर. कई लोग दूसरे शहरों से भी आ रहे हैं. और १७ जून को कुछ जयपुर के और कुछ बाहर के कवियों को मिलाकर एक अनौपचारिक कवि-गोष्ठी करने का इरादा भी है. वैसे मैं तो १ जून को ही जयपुर पहुँच जाऊँगा.
      Yesterday at 3:23am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Sahil भाई, बहुत बहुत शुक्रिया. आपके शब्दों को मैं कभी अपने वाल पर कापी-पेस्ट करूँगा. आपने जो सुझाव दिया है वह काबिल-ए-गौर है पर जब आयोजन हो रहे होते हैं तो बहुत कुछ ध्यान रखना पड़ता है. पैसा उसमें से एक चीज़ तो है ही, यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि कोई असमाजिक तत्व या कोई ऐसा न आ जाए जिसके कारण पूरा कार्यक्रम ही ख़राब हो जाए.

    • सुनीता सनाढ्य पाण्डेय WOW !!!....बहुत अच्छा लगा जानकर...मेरे शहर मे आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है...मेरे लायक कोई भी सेवा हो तो प्लीज़ निःसंकोच बताइएगा....
      Yesterday at 3:26am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub Vipul भाई, आपने अपने न आ पाने की कमी आज पूरी कर दी. आपकी तारीफ़ के लिए और और आपकी शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

    • Sayeed Ayub ज़रूर सुनीता जी. मैं 'नेकी और पूछ-पूछ' में यकीन नहीं करता इसलिए जिसक भी परेशान करने का मन होता है तुरंत, बिना किसी झिझक के कर देता हूँ. :-)
      Yesterday at 3:30am ·  ·  1

    • सुनीता सनाढ्य पाण्डेय बिलकुल...हक़ से कीजिये.....:)
      Yesterday at 3:32am ·  ·  1

    • Sayeed Ayub ‎:-)
      Yesterday at 3:32am ·  ·  1

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