घरेलू हिंसा निरोधक कानून 2005 को अक्टूबर 2006 में लागू किया गया ! इसमें घरेलू हिंसा की परिभाषा , दोषी के खिलाफ कार्यवाई और पीड़िता के लिए राहतों का पूरा व्योरा दिया गया है ! यह कानून हर महिला को हिंसामुक्त घर में रहने की आज़ादी देता है ...
कब दर्ज हो सकती है शिकायत
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- अगर महिला के साथ मारपीट हो .
- उसे घर में रहने न दिया जाए, जेब खर्च न दिया जाए.
- उसके जेवर और पैसे न दिए जाए .
- मेडिकल सुविधाएँ न दी जाएँ, प्रोपर्टी में जायज़ हक़ न दिया जाए .
- उसको उसकी पसंद का काम न करने दिया जाए .
- उसकी मर्ज़ी के खिलाफ बार-बार उससे संपर्क किया जाए .
- उसे या उसके परिवार को धमकी या ताने दिए जाएं .
- उसे बच्चा या बेटा न होने पर दोषी ठहराया जाए .
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- इस कानून के दायरे में महिला के पति के अलावा पिता, भाई, देवर और प्रेमी भी आतें हैं, मोटे तौर पर इस कानून के तहत पुरुषों के खिलाफ ही कार्यवाई होती है लेकिन अगर परिवार की कोई महिला भी टॉर्चर करती है तो पीड़ित महिला उसके खिलाफ भी इस कानून का सहारा ले सकती है !
हाल में महिलाओं के खिलाफ भी इस एक्ट के तहत शिकायत के मामले सामने आये हैं !
इसी तरह पत्नी या किसी और रिश्तेदार महिला से पीड़ित पुरुष भी इस कानून का सहारा ले सकता है !
- बच्चे को भी इस कानून का लाभ मिल सकता है , कोई भी बालिग उसकी ओर से शिकायत दर्ज कर सकता है !
- यह सिविल एक्ट यानी दिवानी कानून है , इसमें दोषी को सजा का प्रावधान नहीं है लेकिन पीड़िता को राहत ज़रूर मुहैया कराया जाता है , हलाकि ज़रूरत पड़ने पर यह कानून फौजदारी में भी बदलता है , मसलन पीड़िता मारपीट से ज़ख़्मी हो जाए तो यह मामला क्रिमिनल केस में तब्दील हो जाएगा , कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो तो भी पुलिस केस दर्ज कर सकती है !
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क्या क्या राहतें हैं ? --------------------
-यह कानून महिलाओं को फिजिकल , मेंटल , इमोशनल , इकनोमिक और सेक्सुअल वायलेंस से सुरक्षा प्रदान करता है !
- महिला के साथ जबरन संपर्क की कोशिश , उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके काम करने की जगह या रहने की जगह जाने पर इस कानून की मदद ले सकती है !
- स्त्रीधन को महिला से कोई नहीं ले सकता , उसके या दोनों के ज्वाइंट एकाउंट या लोंकर को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ आपरेट नहीं किया जा सकता !
- महिला या उसके मायके वालों के साथ मौखिक या शारीरिक हिंसा नहीं की जा सकती !
- कोर्ट साझा मकान में से पुरुष को निकलने का आदेश दे सकता है , महिला को नहीं दे सकता !
- महिला जिस हिस्से में रह रही है पुरुष के उसमें जाने पर रोक लगायी जा सकती है !
- साझा मकान या उसके किसी भी हिस्से को महिला की मर्ज़ी के खिलाफ नहीं बेचा जा सकता , महिला अगर अलग रहना चाहे तो उसे किराये पर मकान मुहैया कराना पुरुष की जिम्मेदारी है , उसका गुजारा और मेडिकल का खर्च उठाना भी पुरुष की जिम्मेदारी है !
- महिला को बच्चों की टेम्परेरी कस्टडी मिल सकती है , नुकसान की भरपाई व इलाज़ का खर्च मिल सकता है !
जारी है ....

