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Tuesday, August 13, 2013

"डायरी लेखन सम्मान समारोह - २०१३ "- रिपोर्ट

"डायरी लेखन सम्मान समारोह - २०१३ " रिपोर्ट -
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दिनांक १०/०८/२०१३ को मानसरोवर गार्डन स्थित आर्यसमाज मंदिर में "डायरी लेखन सम्मान समारोह " आयोजित किया गया जिसमें झुग्गियों में रहने वाली लड़कियों को उनके लेखन के लिए सम्मानित किया गया । इस समारोह का आयोजन गैर-सरकारी एवं सामाजिक संगठन फरगुदिया समूह द्वारा किया गया.

विदित हो कि कुछ माह पहले फरगुदिया समूह द्वारा झुग्गी में रह रही महिलाओं और लड़कियों को लेखन हेतु प्रोत्साहित करने के लिए डायरी उपहार स्वरुप भेंट की गयीं थीं । इस प्रोत्साहन का सकारात्मक परिणाम सामने आया जब उन लड़कियों ने अपने विचार और अपने सपनों को इन डायरियों में लिखना शुरू किया । कुछ ने तो अपने भाव कविताओं में व्यक्त किया । ऐसी और लड़कियों को पढ़ने-लिखने के साथ अपनी रचनात्मकता को बाहर लाने के लिए इस समारोह का आयोजन किया गया । जिन लड़कियों ने पहले से अपनी डायरी लिखी थी उन्हें प्रतीक-चिन्ह , प्रमाण-पत्र और कुछ पुस्तकों के साथ सम्मानित किया गया तथा आर्थिक सहयोग भी दिया गया .



कार्यक्रम में काजल,ज्योति,प्रेमा,प्रियंका,पूनम ने अपनी डायरी अंश का पाठ भी किया, डायरी लेखिकाओं में रूबी, रितु और परवीन निजी कारण से और दिल्ली से बाहर होने की वजह से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सकीं, परवीन को तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद कुछ निजी कारणों की वजह से पढ़ायी छोडनी पड़ी, सोलह वर्षीय परवीन सब्जी बेचने में अपने पिता की मदद करतीं हैं, परवीन आगे और पढना चाहतीं हैं , फिर से स्कूल जाना चाहती हैं , परवीन के पिता नशा करतें हैं जिसकी वजह से परवीन और घर के सभी सदस्य तनाव में रहतें हैं, नन्ही परवीन ने अपने नाजुक कन्धों पर गृहस्थी का बोझ उठाया हुआ है , इन्ही सब समस्याओं का जिक्र परवीन ने अपनी डायरी में किया है, 21 वर्षीय रूबी विवाहित हैं , बचपन से लेकर युवावस्था तक रूबी का जीवन किस तरह संघर्ष में बीता ,इसका जिक्र रूबी ने अपनी डायरी में किया है, छः वर्ष की खेलने-कूदने की उम्र में रूबी सुबह तीन बजे उठकर सड़क किनारे अपने पिता के संग चाय बेचती थी और उसके बाद वही सड़क किनारे तैयार होकर स्कूल चली जाती थी, आर्थिक तंगी की वजह से कभी -कभी रूबी और उसके परिवार को भूखे पेट भी सोना पड़ा . लगभग बारह- तेरह वर्ष की उम्र में रूबी के माता -पिता ने उसका विवाह कर दिया , विवाह के बाद इतनी छोटी उम्र में भी रूबी की वही छः वर्ष की उम्र वाली दिनचर्या थी , पहले वो तीन बजे उठकर अपने पिता के व्यवसाय में उनकी मदद करती थी , अब वो चार बजे उठकर पहले अपने ससुराल वालों के लिए खाना बनाती है , उसके बाद दूसरों के घरों में काम करने जाती है . अभाव में रहते हुए.. संघर्ष करते हुए रूबी जिस तरह अपना जीवन व्यतीत कर रही है उसी का जिक्र अपनी डायरी में किया है . पंद्रह वर्षीय काजल ने अपनी डायरी में गद्य के साथ- साथ पद्य में भी बहुत सुन्दर और गंभीर कवितायेँ लिखीं हैं, काजल कार्यक्रम में उपस्थित थी , उन्होंने डायरी में लिखी बेहद खूबसूरत कविता "नए मांझे" का पाठ किया , डायरी पढ़ते हुए वो भावुक भी हो गयी , उसके रोने से कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे , काजल नौवीं कक्षा की छात्रा हैं. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री सुमन केसरी जी ने सभी लड़कियों के लेखन को सराहते हुए उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें दीं और लड़कियों के लिए अपनी बनायीं पाठ्यपुस्तकें सरगम और स्वरा फरगुदिया समूह को भेंट की . कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें वरिष्ठ व्यंगकार डॉ हरीश नवल जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि " जिस घर में बेटियाँ ना हों वो घर रेगिस्तान की तरह होता है", डायरी लिख रही लड़कियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल लडकियां हर क्षेत्र में आगे जा रहीं हैं , आत्मविश्वाश और लगन से आप सब भी अपने भीतर छिपी प्रतिभा को मूर्त रूप दो । कार्यक्रम में उपस्थित लेखिका रमा भारती जी ने भी लड़कियों को संबोधित करते हुए उनका हौसला बढाया । इन लड़कियों को बोधि प्रकाशन द्वारा भेजी गयी पुस्तकें भेंट की गईं, साहित्यिक पत्रिका मगहर के संपादक मुकेश मानस जी ने अपने आरोही प्रकाशन के कविता संग्रह और कुछ अन्य पुस्तकें लड़कियों को भेंट की, ग़ज़लकार आनंद द्विवेदी जी ने भी अपना ग़ज़ल संग्रह लड़कियों को भेंट किया । कार्यक्रम के अंत में फरगुदिया समूह की सदस्य और संयोजक डॉ वंदना ग्रोवर जी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।

कार्यक्रम का संचालन समूह की संस्थापिका शोभा मिश्रा ने किया । दीपक, चंद्रकांता,निरुपमा सिंह,सरोज सिंह, इंदु सिंह, सुशील कृष्नेत, अंजू शर्मा, मृदुला शुक्ला,राघव विवेक पंडित, रविन्द्र के दास, सरिता दास, , प्रगति मिश्रा, परिक्रमा, आयुशी आदि लोगों की उपस्थिति और सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ .


शोभा मिश्रा
संचालिका/संस्थापक

फरगुदिया समूह

Friday, January 11, 2013

'इनकी भी सुनें ' कार्यक्रम की रिपोर्ट



ये घरों में साफ़ - सफाई और दूसरे कई तरह के घरेलू काम करतीं हैं,आमतौर पर हर रोज सुबह ऑफिस जाने वाले लोग सैर पर या एक्सरसाईज के लिए घर से बाहर जातें हैं उस समय ये अपने घर का काम ख़त्म करके इनके घरों में काम कर रहीं होतीं हैं, इनके खुद के बच्चे भी स्कूल जातें हैं, लेकिन ये रोजी-रोटी के लिए दूसरों के बच्चों का टिफिन तैयार करने के लिए अपने बच्चों को छोड़कर दूसरों के घरों में काम करने आ जातीं हैं | घरों में काम करने वाली इन महिलाओं की बहुत सारी समस्याएँ होती हैं, शारीरिक रूप से तो ये कमजोर होतीं ही हैं, मानसिक रूप से भी इन्हें अपने मालिकों के तानों या काम से वापस घर लौटने पर पति द्वारा की हुई पिटाई करके प्रताड़ित की जाती हैं, आर्थिक तंगी .. सरकार द्वारा मिले अधिकारों से अनभिज्ञ अपनी जीविका चलाने के लिए ये महिलाऐं मजूबर हैं कम वेतन में अथक परिश्रम करने के लिए .

विगत दिनों ४ नवम्बर को   नयी दिल्ली के कीर्ति नगर पुलिस स्टेशन के पास एक पार्क में इनकी इन्ही समस्याओं को सुनने के लिए और इन्हें समझने के लिए फर्गुदिया समूह द्वारा एक आयोजन 'इनकी भी सुनें '
  किया गया, लगभग चालीस से भी अधिक घरों में काम करने वाली महिलाओं ने इस आयोजन में भाग लिया, सबकी अपनी अलग-अलग समस्यें थीं.

उनमें से एक महिला ने बताया की अगर थोड़ी भी देर हो जाए तो मालकिन उसे अपमानित करती है, बीमारी-हजारी में छुट्टी करने पर निर्धारित तनख्वाह में से पैसे काट लिए जातें हैं .

वेतन और मालिक की परेशानी से अलग परेशानी का जिक्र एक महिला ने किया, उसने बताया कि इतनी महंगाई में वो झुग्गी का किराया बारह सौ रुपये देती है, ब्लैक में सिलेंडर भी बारह सौ रुपये का ही लेना पड़ता है जबकि महीने भर की आमदनी होती है तीन हजार रुपये.

पूनम और बहुत सारी महिलाओं की एक सामान समस्या थी, उन सभी के राशन कार्ड नहीं थे, न ही उन्हें ये जानकारी थी कि राशनकार्ड कैसे और कहाँ बनतें हैं.

आर्थिक तंगी तो थी ही कुछ ने अपनी घरेलू समस्याओं का भी जिक्र किया, जैसे_ पति शराब पीता है और शराब के नशे में उनकी पिटाई भी करता है .

कुछ महिलाओं को स्वास्थ्य सम्बन्धी ऐसी समस्याएँ थी जिनकी तरफ हमने उनका ध्यान खिंचा, दाँतों से सम्बंधित गंभीर बीमारी से ग्रसित महिलाओं की उसके घातक परिणाम के बारे में बताया गया , ( विदित हो की साधारण समझी जाने वाली दांतों की बीमारी से रोगी की जान भी जा सकती है ) 

घरों में काम करने वाली करीब चालीस महिलाओं की समस्या हमने सुनी ... उनकी समस्या सुनते हुए जब हमने उनसे ये कहा कि "हम भी आपकी ही तरह हैं .. हम भी काम करतें हैं .. आपसे अलग नहीं हैं " तब उन महिलाओं के चेहरों पर आया आत्मविश्वास वहां उपस्थित सभी लोगों ने देखा, छोटे - छोटे उपहार पाकर ये सभी बहुत खुश थीं .

कुछ की समस्याओं का समाधान उसी समय सलाह और सुझाव देकर कर दिया गया, कुछ महिलाऐं जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं उन्हें राशनकार्ड बनवाकर दिए जायेंगें, झुग्गी में रहने वाली कुछ घरेलू महिलाएं जो सिलाई सीखना चाहती हैंउन्हें सिलाई सिखवाया जायेगा . फर्गुदिया समूह के सदस्य मिलकर उनके लिए और भी कई योजनाएं बना रहें हैं जिससे वे आर्थिक रूप से समृद्ध होंगी .. शिक्षित होंगी .. अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी .


फर्गुदिया संचालिका
शोभा मिश्रा

Monday, November 05, 2012

फर्गुदिया : ' इनकी भी सुने ' कार्यक्रम की रिपोर्ट


फर्गुदिया : ' इनकी भी सुने ' कार्यक्रम पर सईद अयूब की रिपोर्ट
सईद अयूब : कुशीनगर ( उत्तर प्रदेश )
उच्च शिक्षा जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से
अमेरिकन इंस्टीटयूट ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ में अध्यापन
संस्थापक, सह-निदेशक S . A  ZABEEN  Pvt . Ltd ज्ञानोदय और विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशन
वे जिस तरह के माहौल में रहती हैं और काम करती हैं, वह सचमुच शोचनीय है. उन महिलाओं में अधिकतर ने बताया कि उन्हें महीने में कोई छुट्टी नहीं मिलती (जबकि सरकार द्वारा महीने में चार छुट्टियाँ निर्धारित की गयी हैं) अगर किसी कारण वश वे छुट्टी लेती हैं तो मालिक पैसे काट लेते हैं, वे जिन झुग्गी-झोंपड़ियों में रहती हैं उनका किराया हज़ार रुपये से लेकर 1500 रूपये तक है जबकि सरकार द्वारा निर्धारित रेट 600-800 रूपये है. उनमें से कई के पतियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं, खुद वे भी कोई स्वस्थ नहीं थीं. उनमें से हर एक अपनी उम्र से बड़ी दिख रही थी. उनमें से कई का विवाह तभी हो चुका था जब विवाह करना भारतीय क़ानून के अनुसार अपराध है. वे महीने में (पति की कमाई को जोड़ कर) जितना कमाती हैं, उतने से दिल्ली जैसे शहर नहीं बल्कि गाँव-देहात में भी जीवन-यापन करना अत्यंत मुश्किल है. इसका मतलब है बस वे किसी तरह से जी रही हैं. दिन भर काम करने के बाद वे उन्हें अपने घरों में भी काम करना पड़ता है, (कभी-कभी) पति के ताने, लात-घूसे और शराब की बदबू को भी बरदास्त करना पड़ता है. बच्चों की पढ़ाई और उनकी हारी-बीमारी और विवाह की चिंता इन महिलाओं को असमय ही बूढ़ा कर दे रहा है.

 

नंत समस्याओं में से ये कुछ समस्याएँ हैं जो आज निकलकर सामने आयीं. अगरचे मैं अपने घर काम करने वालियों वालों से यथासंभव संवाद करता रहता हूँ और उनके दुख-सुख से कुछ हद तक परिचित भी हूँ पर आज का अनुभव कुछ अलग था. 'फर्गुदिया' समूह द्वारा कीर्ति नगर, दिल्ली में आयोजित 'इनकी भी सुनें' कार्यक्रम में 40 से अधिक घरों में काम करने वाली महिलाओं से मिलना और उनकी समस्याओं को सुनना और उनसे संवाद स्थापित करना कई मायनों में एक सुखद अनुभव था. सबसे अधिक सुखद था यह देखना कि कार्यक्रम के अंत के बाद भी बहुत सी महिलाएँ हमारे पास रुकी रहीं और बात-चीत करती रहीं. वे सब खुश थीं. हमसे बातें करके, अपनी समस्याएँ बता कर, उनका समाधान / समाधान करने का आश्वासन पाकर, हमारे साथ सहज होकर, फोटो खिंचवा कर और 'फर्गुदिया' ग्रुप की ओर से अपना छोटा-मोटा उपहार पाकर. यह सब सुखद अनुभव तो था पर उनके जीवन के बारे में अगर ठीक से सोचा जाए और महसूस किया जाए तो रोंगटे खड़े करने वाले सच हमारे सामने आ जाते हैं. आज की मीटिंग में उन काम करने वाली महिलाओं की कुछ समस्याओं का तत्काल समाधान कर दिया गया, कुछ समस्याओं जैसे राशन कार्ड का न होना आदि के समाधान के लिए प्रयास किये जायेंगे, संभव होगा तो 'फर्गुदिया' ग्रुप के सदस्य सब महिलाओं से अलग-अलग मिलेंगे. उद्देश्य तो अच्छा है, हम कितना सफल हो पाते हैं यह आप सबके सहयोग, दुआओं और शुभकामनाओं पर निर्भर करता है.
ज का कार्यक्रम अगर संभव हो पाया तो शोभा मिश्रा, वंदना ग्रोवर और भरत तिवारी जी के अथक परिश्रम के कारण.चंद्रकांता और डॉ.सुनीता कविता का योगदान भी कम नहीं था. कार्यक्रम में इन लोगों के अतिरिक्त अंजू शर्मा, राघव विवेक पंडित, आनंद द्विवेदी, संतोष राय, रोहित आदि से मिलकर बहुत अच्छा लगा. एक बात और स्पष्ट कर दूँ कि अपनी व्यस्तता के कारण आशुतोष कुमार जी इस कार्यक्रम में नहीं आ सके किंतु इस कार्यक्रम की रूप-रेखा पिछली मीटिंग में उनसे मिले बहुमूल्य सुझावों के आधार पर बनायी गयी थी और उनसे मिले लगातार प्रोत्साहन ने हम सबको इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है. आशा है कि भरत भाई कुछ तस्वीरें लगाएँगे आज के इस छोटे से पर अर्थपूर्ण कार्यक्रम के.
- सईद अयूब ५/११/२०१२ , नई दिल्ली 



Saturday, August 18, 2012

"इन्द्रधनुष और बच्चे"

"इन्द्रधनुष और बच्चे"

दिनांक १४/८/२०१२ को फर्गुदिया समूह द्वारा कला और लेखन प्रतियोगिता का थाना कीर्ति नगर नयी दिल्ली में आयोजन किया गया | प्रतियोगिता में सर्वोदय विद्यालय मानसरोवर गार्डेन के करीब पैंतीस बच्चों ने भाग लिया | स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को किसी विषय विशेष की सीमा में न बांधकर अपनी अभिरुचि के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कला चित्रण के लिए प्रेरित किया गया | प्रतिभागियों में से अधिकांश ने प्रकृति व अपने आस-पास की घटनाओं का चित्रण किया तथा अपने चित्रण से सम्बंधित प्रभावशाली पंक्तियाँ भी लिखीं | कार्यक्रम का मुख उद्देश्य कला और लेखन से जुड़ी छिपी हुई प्रतिभा को बाहर लाना था , हमने जितनी उम्मीद की थी उससे भी कहीं ज्यादा होनहारी का परिचय देते हुए बच्चों ने बहुत ही अच्छी चित्रकारी की ,अधिकतर बच्चों ने कला और लेखन के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा का नेक सन्देश दिया , कुछ ने वर्गों में विभाजित असमानता को अपनी कला के माध्यम से व्यंग के रूप में चित्रित किया , बालमन से निकली अद्भुत चित्रकारी ने सभी का मन मोह लिया , तीसरी कक्षा की एक प्यारी सी नन्ही परी जिसका नाम "चाँद" था कार्यक्रम का आकर्षण बनी रही | चाँद को उनकी सुन्दर चित्रकारी के लिएप्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया गया |



कार्यक्रम में उपस्थित चंद्रकांता ,आनंद जी , निरुपमा जी लगातार बच्चों को प्रोत्साहित करते रहे ,वंदना ग्रोवर जी और भरत जी ने जिस तरह से पूरे कार्यक्रम को संचालित किया और पैंतीस बच्चों में से पाँच प्रतिभागियों के चयन के लिए निर्णायक मंडली का गठन किया उनकी रचनात्मक क्षमता और उससे जुड़े अनुभव तारीफ के काबिल हैं, श्री अनिल कुमार जायसवाल जी ने निर्णायक मंडली में मुख्य भूमिका निभाई , सर्वश्रेष्ठ छः प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी उन्होंने ही किया | उन्होंने बहुत से बच्चों को बाल्पत्रिका नंदन उपहार स्वरुप भेंट की | स्वर्णकांता , रितुपर्णा , श्रीमती मंजू दीक्षित , श्री महेश दीक्षित जी ने कार्यक्रम में न सिर्फ अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई कार्यक्रम में भरपूर सहयोग भी दिया | ज्योत्सना तिवारी , अरुशी तिवारी और प्रगति मिश्रा ने " इन्द्रधनुष" के रंगों को और भी ज्यादा रंगीन कर दिया |



करीब दो घंटे तक चली इस अनोखी प्रतियोगिता के ख़त्म होने के बाद प्रतिभागी बच्चों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित सभी मित्रों ने कुछ खुशनुमा पल बिताये , कुछ देर के लिए हम सभी भूल गए की हमारी उम्र क्या है , उन मासूमों के साथ हँसते खिलखिलाते हम सभी को यूँ लगा कि मानों हम भी अपने बचपन में पहुँच गएँ हों |





निर्णायक मंडल में सम्मिलित श्रीमती वंदना ग्रोवर, श्री अनिल कुमार जायसवाल ( बाल पत्रिका नंदन के मुख्या कापी संपादक ), श्री भरत तिवारी, श्री आनंद द्विवेदी ,श्रीमती निरुपमा सिंह व श्रीमती स्वर्णकांता ने सर्वसम्मति से छः प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया , जिनके नाम हैं ..



सूरज कुमार - प्रथम पुरस्कारचंचल सिंह - द्वितीय पुरस्कारबिट्टू - तृतीय पुरस्कार चाँद , चन्द्र प्रकाश और अंकित को सांत्वना व् प्रोत्साहन पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया |



कार्यक्रम में कीर्ति नगर थानाध्यक्ष की विशेष सहभागिता के लिए उनका बहुत धन्यवाद !

शोभा मिश्रा

Thursday, July 26, 2012

"Fargudiya Mashaal" event

http://www.facebook.com/events/454189434606327/


मित्रों,
''यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता'' की अवधारणा वाले इस देश में नारियों के प्रति जिस प्रकार दिनोंदिन हिंसक और अश्लील वारदातें बढ़ रही हैं वह बेहद चिंतनीय बात है, आज स्त्री अस्मिता की यहाँ वहां जिस तरह भरे बाज़ार बेखौफ धज्जियां उड़ाईं जा रही हैं उसे देख... कर... किसी भी सच्चे भारतीय का सर शर्म में झुक ही जाएगा, इन जघन्य कांडों से गाँव, कस्बे, नगर, महानगर तो क्या राजधानी दिल्ली तक भी बची नही है, जिन्हें आकड़ों में बात सुनने की आदत हो उन्हें भी विदित हो कि देश भर में (गत वर्ष) 'इक्कीस हज़ार बलात्कार' के केस पुलिस थानों में दर्ज हुए और 'छतीस हज़ार पांच सौ छेड़छाड़' के मुक़दमे दर्ज किये गये ..आप समझ ही गये होंगे कि यह संख्या वास्तविक रूप में कितनी भयावह होगी..सामाजिक संकोच वश कितने ही परिवारी अपमानो के घूँट पीकर घरों में बैठ जाते हैं ..दिन प्रतिदिन ये दुर्घटनाएं बढती ही जा रही हैं. अपने समानता के अधिकार ,नागरिक सम्मान और सुरक्षा के लिए आप सब विमर्श के लिए आमंत्रित हैं. कविवर दिनकर कह भी गये हैं -

समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध ..



स्थान - इण्डिया गेट , दिल्ली
दिनांक -२३-०७-२०१२
समय -अपराह्न -०५ :००
निवेदन - १-शोभा मिश्रा २-वंदना शर्मा ३ -आशुतोष कुमार ४- अंजू शर्मा ५-अपर्णा मनोज
*विशेष सूचना :: स्थान परिवर्तन किया गया है. अब जंतर-मंतर की जगह ये इण्डिया गेट है.

विमर्श के लिए आप सभी के साथ हिंदी के समकालीन कवि -कवयित्रियाँ अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे.

आमंत्रित कवि ::
अशोक वाजपेयी
अनामिका
सुमन केसरी अग्रवाल
अरुण देव
मनीषा कुलश्रेष्ठ
वंदना शर्मा
हिमांशु कुमार
अंजू शर्मा
उमा गुप्ता
कविता कृष्णन
भरत तिवारी
अपर्णा मनोज

Friends,

Yatra naaryastu pujyante ramante tatra devataah
“Where women are revered, there the Gods happily stay! “it is very disturbing when we see that the country where such was the level women were placed; is now seeing a tremendous increase in vulgar and heinous incidence on women. The way women's identity has been blown apart and even brazen is something that can hang any true Indian’s head in shame
No place is spared from be it the villages, towns, cites or the National Capital; for those who want the statistics can note that last year the 21,000 cases of rape and 36,000 case of eve teasing were registered in police stations. And this indicates the how scary must be the actual number of these incidents. Social inhibition won’t let many families to report such cases; can you imagine the pain that such families must be going through.
You as a responsible citizen are invited to discuss their right to equality, dignity and security.
Samar shesh hai, Nahin paap ka bhagi keval Vyadh …
(Not just criminal is responsible for crime. Time will speak for truth.)
Jo tatsath hain, Samay likhega unka bhi Apradh …
(Whoever is neutral, Time will decide his/her fate and role in Crime.)
- Ramdhari Singh “Dinkar”

Location - India Gate, New Delhi
Date -23-07-2012
Time - 5:00 PM
Request - 1 - Shobha Mishra 2 - Vandana Sharma 3 - Ashutosh Kumar 4 - Anju Sharma 5 - Aparna Manoj 6 - Advisor: Bharat Tiwari

*Special Information:: location has been changed from Jantar Mantar to India Gate.

To discuss these issues we will have the contemporary Hindi poets and poetess with us.
Invited poets:
Ashok Vajpeyi
Anamika
Suman Kesari Agarwal
Arun Dev
Manisha Kulshrestha
Vandana Sharma
Himanshu Kumar
Anju Sharma
Uma Gupta
Kavita Krishnan
Bharat Tiwari
Aparna Manoj

Thursday, May 31, 2012

एक शाम फर्गुदिया के नाम (Event)

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