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Thursday, May 31, 2012

कार्यक्रम के बारे में श्री पुरुषोत्तम अग्रवाल जी के विचार


अभी अभी लौटा हूँ, 'फरगुदिया के नाम एक शाम' कार्यक्रम से। सविता सिंह, सुमन केशरी, अंजु शर्मा, लीना मल्होत्रा, निरुपमा सिंह, विपिन चौधरी, स्नेह सुधा नवल, सोन रूपा विशाल, स्वाति ठाकुर की कविताएं, रश्मि भारद्वाज का संचालन (और काव्य-पाठ भी).... सार्थक काव्यानुभव था यह
श्री नंद भारद्वाज और श्री हरीश नवल से भेंट भी हुई।
फरगुदिया की स्मृति में कार्यक्रम हर साल होगा और फरगुदिया पुरस्कार भी दिया जाएगा---यह सुखद घोषणा की गयी।
बधाई नहीं, धन्यवाद...शोभा और संजय मिश्र को, सईद अयूब को...ऐसा कार्यक्रम करने और इसमें बुलाने के लिए।
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  • You, Divya Shukla, Sayeed Ayub and 77 others like this.

    • Narendra Kumar Bharti aapne kuch nhi kaha bas ye kami rhgai aapko bi thoda sunlete to bohot jada acha lgta..
      May 27 at 3:01pm via mobile ·  ·  3

    • Purushottam Agrawal ‎Narendra Kumar Bharti, कुछ कार्यक्रमों में मैं बोलने नहीं सिर्फ सुनने जाता हूँ, बंधु, यह कार्यक्रम ऐसा ही था।
      May 27 at 3:35pm ·  ·  5

    • Vipin Choudhary aapkee garimamayi upastithi hee kaafi hai purushottam jee
      May 27 at 3:54pm ·  ·  3

    • Shastri Kosalendradas Sir Pargudiya ke vishay me meri jankari aparyapt hai, anugrah hoga apka ki jara bata de!!!
      May 27 at 4:17pm ·  ·  2

    • Purushottam Agrawal ‎Shastri Kosalendradas, कोसलेन्द्र जी, फरगुदिया सुश्री शोभा मिश्र की बचपन की सहेली थी, ग़रीब परिवार की। चौदह वर्ष की आयु में बलात्कार की शिकार हुई और गर्भपात की दवा दिए जाने के फलस्वरूप मर गयी। उसकी स्मृति में, और स्त्री-व्यक्तित्व के रेखांकन के लिए शोभा जी की पहल पर, सईद अयूब के संयोजन में इस काव्य-पाठ का आयोजन किया गया था।
      May 27 at 4:28pm ·  ·  8

    • Shastri Kosalendradas Ji Sir, Dhanyavaad & Pranaam..
      May 27 at 4:39pm ·  ·  2

    • Shobha Mishra Sir , aapki Garimamay upasthiti kisi karyakram aur ek sarthak pryas ko unchaiyon par le jaane ke liye kaafi hain .. mere paas shabd nahi hain ki kaise apka Aabhaar prakat karun ..!!!
      May 27 at 5:39pm ·  ·  2

    • Anand Kumar Shukla mai bahar tha isliye nahi ja saka. bahut jaruri cheej chhut gayi...((((
      May 27 at 7:44pm ·  ·  2

    • Rashmi Bhardwaj सर, आपकी उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणादायक थी , आपने अपना समय देकर कार्यक्रम का मान बढ़ाया ....
      Monday at 4:08am ·  ·  2

    • Sayeed Ayub सर, कम शब्दों में आपने एक पूरी तस्वीर खींच दी कार्यक्रम की. आप वहाँ आये, पूरे समय वहाँ उपस्थित रहे और फिर आपने यह नोट भी लिखा, इन सबके लिए आभार का कोई भी शब्द छोटा हो होगा. आपकी उपस्थिति पूरे कार्यक्रम के लिए कितनी गरिमामय और प्रेरणादायक थी, इसे भी बयान नहीं किया जा सकता.
      Monday at 5:03am ·  ·  2

पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की रिपोर्ट


एक शाम फरगुदिया के नाम कार्यक्रम के शुभारंभ का दीप-प्रज्वलन अनारा देवी के साथ सविता सिंह, सुमन केशरी और शोभा मिश्र ने किया।अनारा देवी का जीवन-संघर्ष अपने आप में कविता है।
कार्यक्रम में कैंसर को परास्त करने वाली जिजीविषा-सुश्री मंजु दीक्षित- का सम्मान किया जाना खासकर मन को छू गया। — with Suman Keshari Agrawal and Shobha Mishra.
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    • Rakesh Sinha यही युग धर्म है और साहित्य का रचनात्मक पक्ष भी
      May 27 at 3:19pm ·  ·  4

    • Sayeed Ayub शुक्रिया सर इसे शेयर करने के लिए. अनारा देवी एक गरीब विधवा हैं और घरों में काम-काज कर अपने सात बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. सबसे बड़ी बात कि उन्होंने अपनी बच्चियों की पढ़ाई में कोई कोर-कसर नहीं उठा रखा है. वे शिक्षा के महत्व को अच्छी तरह से समझती हैं.
      Monday at 4:25am ·  ·  5

    • Sayeed Ayub मंजु दीक्षित जी अपने आप में एक मिसाल हैं. कैंसर जैसी घातक बीमारी को अपनी जिजीविषा से परास्त कर पूरी उर्जा के साथ न केवल अपनी ज़िंदगी जी रही हैं बल्कि दूसरों को भी प्रेरणा दे रही हैं.
      Monday at 4:28am ·  ·  4

    • Leena Malhotra कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन अनारा देवी द्वारा करना मुझे बहुत अच्छा लगा.. ऐसे मेहनतकश लोग अपनी जिंदगी में संघर्षों की कलम से कवितायेँ लिख रहे हैं उन्हें सम्मान देना बहुत ज़रूरी है
      Monday at 4:40am ·  ·  3

    • Sayeed Ayub बिलकुल सही कहा आपने Leena ji!
      Monday at 4:53am ·  ·  1

    • Shobha Mishra सर , फोटो में कैद इस अद्भुत क्षण को शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!! एक दुर्घटना में हुई पति की मृत्यु के बाद अशिक्षित और बेसहारा अनारा देवी का अकेले इतने बड़े परिवार को संभालना और अपने बच्चों को शिक्षित करना इतना आसान काम नहीं था ..लेकिन उनकी लगन और हिम्मत को सलाम करतीं हूँ ... वो चारदीवारी से बाहर निकली और दिन रात कठिन परिश्रम करके बिना विचलित हुए अपने परिवार का भरण पोषण कर रहीं हैं |
      Monday at 5:40am ·  ·  6

    • Suman Keshari Agrawal कार्यक्रम सच में बड़ा सार्थक था...बहुत कुछ सोचने के लिए बाध्य करने वाला...
      Monday at 6:29am ·  ·  9

    • Chandrakanta Ck एक बेहद सार्थक आयोजन 'फरगुदिया'..
      समाज के घृणित बंधों को तिनका तिनका उधेड़ती कवियित्रियाँ,मन को बींध कर रख देने वाली उनकी रचनाएं और शोभा दी व सईद सर का यह साहसी प्रयास निश्चय ही एक ईमानदार कोशिश का संकेत था.स्वाति की कलम आत्मविश्वास से लबरेज थीं और विपिन की ‘रजस्वला’ पर अभिव्यक्ति नें मन को छू लिया.शायक की रचना हमेशा की तरह बंद दरवाजों पर दस्तक देती सी .सुमन जी की चिर-परिचित सहजता और स्त्री मन को एक खास लहजे में टांकना हर बार आकर्षित करता है..
      स्त्री सम्वेदना को मंच पर एकजुट देखकर उस टूटे हुए मन को कहीं गहरी सांत्वना और साहस मिला जिसे जब-तब-अक्सर समाज के एकतरफा नियमों/रिवाजों के समक्ष आहूत कर दिया गया अंत में,एक बात जो अभी स्त्रियों को सीखनी है वह खुद को देह-जड़ता की परीधि से बाहर ले आना ..

      Tuesday at 12:11pm ·  ·  2

    • Shobha Mishra ‎(एक बात जो अभी स्त्रियों को सीखनी है वह खुद को देह-जड़ता की परीधि से बाहर ले आना ..) aapke is kathan se 100% sahmat hoon ..! shukriya Chandrakanta !!

    • Shobha Mishra Shukriya Suman Di !!!

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